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Wednesday, May 6, 2020

भारत की विभिन्न प्रकार की मिट्टियां - Different types of soils of India.

  ** भारत की विभिन्न प्रकार की मिट्टियां**

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने भारतीय मिट्टी को 8 भागों में बांटा है। ( Indian council of agricultural Research I.C.A.R ) 

1. काली मिट्टी 2. जलोढ़ मिट्टी 3. लाल मिट्टी 4. लेटराईट मिट्टी 5. क्षारयुक्त मिट्टी 6. रेतीली मिट्टी 7. कांप मिट्टी 8. वनों वाली मिट्टी।

काली मिट्टी एक परिपक्व मिट्टी है, जो मुख्यतः दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के लावा क्षेत्र में पाई जाती है, इसका निर्माण चट्टानों के दो वर्ग दक्कन ट्रैप एवम लौहमय नीस और शिस्ट से हुआ है, यह मिट्टी भारत की कछारी भागों में मुख्य रूप से पाई जाती हैं। काली मिट्टी में कैल्शियम पोटेशियम मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। तथा इसमें नाइट्रोजन की मात्रा कम होती है।


जलोढ़ मिट्टी प्रकृति की एक उपजाऊ मिट्टी है, उत्तरी भारत में जो जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है, वह तीन मुख्य नदियों द्वारा लाई जाती है, सिंधु नदी गंगा नदी एवं ब्रह्मपुत्र नदी, इसलिए हम समझ सकते हैं की यह मिट्टी राजस्थान के उत्तरी भाग पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तथा आसाम के आधे भाग में पाई जाती है।

भारत में लाल मिट्टी द्वारा कुल आच्छादित क्षेत्र लगभग 18.6 फ़ीसदी है, भारत में लाल मिट्टी तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, तथा पश्चिम बंगाल में पाई जाती है।

भारत में लेटराइट मिट्टी तमिलनाडु के पहाड़ी भागो एवं निचले क्षेत्रो, कर्नाटक के कुर्ग जिले, केरल राज्य के चौड़े समुद्री तट, महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले, पश्चिमी बंगाल के वेसाइट और ग्रेनाइट पहाड़ियों के बीच उड़ीसा के पठार के ऊपरी भाग में मिलती है।


भारत में हल्की मिट्टी शुष्क एवं अर्धशुष्क प्रदेशों जैसे पश्चिम राजस्थान एवं अरावली पर्वत के क्षेत्रों, उत्तरी गुजरात, दक्षिणी हरियाणा, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाई जाती है। कांप मिट्टी को जलोढ़ या कछारीय मिट्टी भी कहा जाता है। यह भारत के लगभग 40% भाग में पाई जाती है।

धान की खेती के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। कपास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी काली मिट्टी है। लावा के प्रवाह से काली मिट्टी का निर्माण होता है। जलोढ़ मिट्टी पोटेशियम से भरपूर होती है। क्षारयुक्त मिट्टी को थूर, ऊसर, कल्लहड़, राकड़, रे, चोपन के नामों से भी जाना जाता है। 

काली मिट्टी का दूसरा नाम रेगुर मिट्टी है।काली मिट्टी कपास की फसल के लिए सबसे अधिक उपयोगी होती है। चाय की खेती के लिए सबसे अधिक उपयुक्त मिट्टी लैटराइट मिट्टी है।भारत में काली मिट्टी लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। 


लाल मिट्टी का लाल रंग लौहऑक्साइड के कारण होता है। नवीन जलोढ़ मिट्टी को खादर मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है। भारत में जलोढ़ मिट्टी सर्वाधिक पाई जाती है। लैटराइट मिट्टी का रंग लौहऑक्साइड की उपस्थिति का परिणाम है। हल्की काली एवम दलदली मिट्टी में ज्यादातर जैविक तत्व अधिक पाया जाता है।

भारत में सर्वाधिक क्षारीय क्षेत्र गुजरात राज्य में पाया जाता है। अम्लीय मिट्टी सोयाबीन, मूंगफली, फ्रेंच बीन, अरहर, आदि के लिए उपयुक्त है। मृदा अपरदन को वनारोपण करके रोका जा सकता है। लावा मिट्टियां मालवा के पठार में पाई जाती है।

लैटराइट मिट्टी केरल में अधिक पाई जाती है। गंगा के मैदान की पुरानी कछारी मिट्टी बांगर मिट्टी कहलाती है। मृदा की जलधारण क्षमता सबसे कम बुलई दोमट मिट्टी में होती है। भारत में सबसे बड़ा मिट्टी का वर्ग कछारी मिट्टी है।


भारतीय मृदाओं में जस्ता सूक्ष्म तत्वों की कमी होती है। भारत में लवणीय मृदा का सर्वाधिक क्षेत्रफल गुजरात राज्य में है। भारत को प्राकृतिक आधार पर चार भागों में बांटा गया है। 1. उत्तर का पर्वतीय प्रदेश 2. गंगा तथा ब्रह्मपुत्र का मैदान 3. दक्षिण का पठार 4. तटीय प्रदेश।

पृथ्वी पर ऑक्सीजन की मात्रा 47% है। भूमि पर सिलिकॉन की मात्रा 28% है। धरती पर एलुमिनियम की मात्रा 8% है। भूमि पर लोहा की मात्रा 4.5 प्रतिशत एवम अन्य तत्व होते है।

मिट्टी का निर्माण टूटी चट्टानों के छोटे महीन कणों खनिज, जैविक पदार्थों, बैक्टीरिया आदि के मिश्रण से होता है। मिट्टी की कई परतें होती हैं, सबसे ऊपरी परत में मिट्टी के छोटे कड़ गले हुए पौधे और जीवो के अवशेष मिले होते हैं। यह परत फसलों की पैदावार के लिए महत्वपूर्ण होती है।मिट्टी की दूसरी परत जैसे महीन कणों चिकनी मिट्टी की बनी होती है। और नीचे की विखंडित चट्टानों का मिश्रण होती है। तथा आखरी परत में अ-विखंडित सख्त चट्टाने होती हैं।